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राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर


वर्तमान में राजस्थान राज्य अभिलेखागार का मुख्यालय बीकानेर में है जबकि इसकी सात मध्यवर्ती शाखाऐं क्रमशः जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अलवर, अजमेर एवं भरतपुर में स्थित है। प्रारम्भ में इसकी स्थापना 1955 में जयपुर में की गई थी, जिसे 1960 में बीकानेर में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्तमान राज्य अभिलेखागार राजस्थान के स्वाधीनता के पूर्व की  विभिन्न रियासतों एवं केंद्रीय राज्यों में स्थित सामान्य रिकॉर्ड कार्यालयों तथा इसी तरह की रिकॉर्ड एजेंसियों का उत्तरोत्तर रूप है।

जयपुर में 1955 में स्थापित राज्य अभिलेखागार के क्षेत्रीय कार्यालय तत्कालीन राजस्थान में सम्मिलित की गयी पूर्व चीफ कमिश्नर प्रोविंस अजमेर-मेरवाड़ा सहित सभी रियासतों व राज्यों में थे। 

इसका उद्देश्य स्थायी महत्त्व के प्राचीन अभिलेखों को सुरक्षा प्रदान करना, वैज्ञानिक पद्धति द्वारा अभिलेखों को संरक्षण प्रदान करना तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे न्यायालय, सरकार के विभागों, शोध अध्येताओं तथा आमजन को उपलब्ध कराना है।

राजस्थान राज्य अभिलेखागार बीकानेर में राजपूताना की तत्कालीन रियासतों एवं वर्तमान राज्य सरकार के 25 वर्ष से अधिक पुराने ऐतिहासिक एवं प्रशासनिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण अभिलेखों को सुरक्षित एवं संरक्षित रखा गया है। विभाग  में संचित अभिलेख  17वी  शताब्दी  से प्रारम्भ  होते  है।

विभाग अभिलेखों के प्रति जनसाधारण में चेतना जागृत करने के लिए प्रदेश में समय-समय पर प्रदर्शनियां, संगोष्ठियां और सेमीनार आदि का आयोजन करता है। विभाग द्वारा मूल अभिलेखों पर आधारित विवरणात्मक सूचियां एवं स्वयं के प्रकाशन प्रकाशित करवाने का कार्य भी किया जाता है। वर्तमान में विभाग के 55 से अधिक प्रकाशन प्रकाशित हो चुके है। इनमें ख्यातनाम इतिहासकारों द्वारा लिखित “राजस्थान का इतिहास” (तीन भाग) स्वाधीनता संग्राम के साक्षी (स्वतंत्रता संनानियों के संस्मरण) और राजस्थान रोल्स इन दी स्ट्रगल ऑफ़ 1857 एवं “फारसी फरमानों के प्रकाश में मुगलकालीन भारत एवं राजपूत शासक”, भाग- I] II एवं III तथा पुरंधर की सन्धि प्रकाशन उल्लेखनीय है।

 

महत्त्वपूर्ण कार्य एवं उपलब्धियाँ -

विभाग का प्रमुख कार्य अभिलेखों को सुरक्षित एवं संरक्षित करना, इनकी सूचियां तैयार करवाना तथा सरकारी एवं अर्द्धसरकारी कार्यालयों के अभिलेखों एवं अभिलेख कक्षों का निरीक्षण कर उनके उचित रख-रखाव तथा संरक्षण के लिए सुझाव इत्यादि देना है।

इसकी महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों एवं क्रियाकलापों का विवरण निम्नानुसार है-


  • इसमें भूतपूर्व रियासतों तथा 25 वर्ष से अधिक के दीर्घकालीन महत्त्व के अभिलेख सुरक्षित किए गए हैं।

  • शोध का प्रकाशन करना तथा संदर्भ सूचियाँ तैयार करना।

  • अभिलेखों की मरम्मत करना तथा पुनर्वास करना।

  • निजी संस्थाओं, परिवारों एवं व्यक्तियों से सम्पर्क कर अभिलेखों का पता लगाना।

  • मौखिक इतिहास परियोजना द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों की यशोगाथा एवं संस्मरणों को ध्वनिबद्ध कर सामग्री तैयार करना।

  • अभिलेख सप्ताह के माध्यम से प्रदर्शनी लगाकर लोगों को जागरुक करना।

अभिलेखागार के प्रमुख कार्यों का विस्तृत विवरण इस प्रकार है -

1. डिजिटल-अभिलेखागार -

 

विभाग द्वारा राजपूताना की भूतपूर्व रियासतों के 1 करोड़ से अधिक ऐतिहासिक व प्रशासनिक अभिलेखों के डिजिटाईजेशन का कार्य पूर्ण कर 80 लाख अभिलेखों को अपनी वेब-साईट http://rsad.artandculture.rajasthan.gov.in पर अपलोड कर दिया गया है।

पूर्व  में अपने घरों, मकानों व जमीन संबंधी पट्टों को ढूंढने/सर्च करने में महिनों लग जाते थे। लेकिन अब बीकानेर संभाग (बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर तथा हनुमानगढ़ जिले) के लगभग 4 लाख से अधिक पट्टों का डिजिटाईजेशन करवाकर मारवाड़ी से हिन्दी व अंग्रेजी में डाटा फिडिंग करवाने से जनसाधारण को डिजिटाईजेशन के पश्चात् 5 मिनट में अपने घर/मकान/जमीन से सम्बंधित पट्टों को देखकर सत्यापित प्रति लेने में आसानी हो गई है। विभाग ने जनसाधारण के उपयोग के लिये कियोस्क भी लगा रखे हैं, जिसका उपयोग कर जनसाधारण पट्टों को निःशुल्क सर्च कर रहे हैं।

 

2. डिजिटाईजेशन व माईक्रोफिल्मिंग -

 

राजपूताना की भूतपूर्व रजवाड़ों के ऐतिहासिक व प्रशासनिक अभिलेखों के डिजिटाईजेशन व माईक्रोफिल्मिंग कार्य के तहत बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अलवर, सिरोही, टोंक तथा अजमेर रियासत के अब तक 1 करोड़ से अधिक अभिलेखों का डिजिटाईजेशन पूर्ण कर चुका है, जिनमें दुर्लभ पुस्तकों के 19.16 लाख पृष्ठों का डिजिटाईजेशन कार्य शामिल है।

 

3. अभिलेख म्यूजियम का निर्माण-

 

रूपये 10.80 करोड़ की लागत से राजस्थान राज्य अभिलेखागार में “अभिलेख म्यूजियम” का निर्माण किए जाने का प्रावधान किया गया है। इस अभिलेख म्यूजियम का उद्देश्य आजादी से पूर्व के विविध राजपूतों, रजवाड़ों के मूल दस्तावजों तथा मुगलकालीन इतिहास स्रोतों के विविध स्वरूपों की मूल्यवान श्रृंखलाओं का जो अद्वितीय खजाना इस अभिलेखागार में सुरक्षित व संरक्षित है, जो निम्नांकित मूल्यवान जानकारियों से युक्त ऐतिहासिक दस्तावजों की विविध श्रृंखलाओं से युक्त मूल दस्तावजों के विविध रूपों में है।

  • मुगलकालीन फरमान, 

  • निशान मन्सूर, 

  • अर्जदास्त, 

  • ताम्रपत्र, 

  • रजत पत्र, 

  • सियाह हुजूर, 

  • अखबारात, 

  • वकील रिपोर्ट्स, 

  • तोजियो, 

  • बहियां, 

  • रुक्के - परवाने

  • राजस्थान की भूतपूर्व रियासतों के महकमा खास के प्रशासनिक-ऐतिहासिक अभिलेख आदि।

 

उक्त संग्रहालय में राजस्थान राज्य अभिलेखागार में उपलब्ध 350-400 मूल अभिलेखों को प्रदर्शित किया जायेगा। उक्त संग्रहालय के निर्माण से राजस्थान का नाम विश्व में शोध व पर्यटन मानचित्र पर दर्ज होगा। अभिलेख म्यूजियम का कार्य प्रगति पर है।

 

4. विभागीय प्रकाशन -

विभाग के मूल अभिलेखों पर आधारित 55 से अधिक प्रकाशन है। मूल अभिलेखों पर आधारित विवरणात्मक सूचियों एवं पुस्तकों का प्रकाशन का कार्य इस विभाग द्वारा समय-समय पर सम्पादित करवाया जाता है, जो शोध अध्येताओं एवं जन साधारण के लिये अत्यन्त उपयोगी है। गत वर्षो में विभाग द्वारा मूल अभिलेखों पर आधारित 15 से अधिक प्रकाशन प्रकाशित किये जा चुके है, जिनमें निम्नलिखित प्रकाशन प्रमुख है -

 

  • फारसी फरमानों के प्रकाश में मुगलकालीन भारत एवं राजपूत शासक भाग -3

  • फारसी फरमानों के प्रकाश में मुगलकालीन भारत एवं राजपूत शासक भाग-4

  • 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में राजपूताना की भूमिका

  • पुरन्धर की सन्धि

  • गंगा रिसाला-द केमल कॉर्प

  • अभिलेख जर्नल

  • पाण्डुलिपि संरक्षण

  • लेजिस्लेटिव असेम्बली ऑफ़ बीकानेर स्टेट (ए स्टडी ऑफ़ आरकाईवल सोर्सेज)

“फारसी फरमानों के प्रकाश में मुगलकालीन भारत एवं राजपूत शासक” -

इसी प्रकार मुगल बादशाहों द्वारा राजपूत मनसबदारों को लिखे गये फरमान जो कि फारसी भाषा में है, का हिन्दी व देवनागरी में अनुवाद करवाकर 80, 82, व 117 फरमानों के तीन वाल्यूम “फारसी फरमानों के प्रकाश में मुगलकालीन भारत एवं राजपूत शासक” नाम से प्रकाशित किये जा चुके है। ताकि मूल स्रोत सामग्री के रूप में इसका उपयोग मध्यकालीन भारत पर शोध करने वाले शोधार्थी कर सके एवं इन पुस्तकों द्वारा मध्यकालीन भारत का इतिहास परिमार्जित हो रहा है।

 

5. स्वतंत्रता सेनानियों के संस्मरण एवं ‘‘स्वतंत्रता सेनानी दीर्घा’’-

 

प्रदेश के 246 स्वतंत्रता सेनानियों के संस्मरणों को सी.डी. व हार्ड डिस्क में सुरक्षित किया गया है। प्रदेश के ‘‘220 स्वतंत्रता सेनानियों की सचित्र दीर्घा’’ का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इन स्वतंत्रता सेनानियों के संस्मरणों को विभाग की वेबसाईट - http://rsad.artandculture.rajasthan.gov.in पर ऑनलाईन किया जा चुका है। इनके संस्मरणों पर संभागवार पुस्तकों का प्रकाशन किया है।

 

6. अभिलेखों की व्यवस्था एवं सूचीकरण -

 

अभिलेखों की व्यवस्था 62738 एवं सूचीकरण 6612 के अन्तर्गत विवरणात्मक सूची खतूत-महाराजगान (फारसी) चीफ कमीश्नर, अजमेर, महकमाखास, जोधपुर, बीकानेर अंग्रेजी रिकॉर्ड हुकुमत, बाली, राजस्व एएसओ, ब्यावर, राजगढ़, भीलवाड़ा, दीवानी अलवर एवं स्टेट कौन्सिल भरतपुर की पत्रावलियों को पुर्नव्यवस्थित किया गया तथा अभिलेखों की सूचियां बनाई गई।

 

7. शोध में सहायता  -

 

देश-विदेश के शोधार्थियों के अध्ययन के लिए वातानुकूलित 10 कम्प्यूटरों से युक्त शोध कक्ष एवं 12 कम्प्यूटरों से युक्त विभागीय कम्प्यूटर शोध-कक्ष है। डिजिटल होने से पूर्व विभाग में एक वर्ष में लगभग 100-125 शोधार्थी देश-विदेश से शोध करने आते थे। डिजिटल अभिलेखागार बनने के पश्चात 250-300 से अधिक शोधार्थी प्रति दिन ऑनलाईन अध्ययन कर रहे है। 

 

8. राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन -

 

विभाग द्वारा राष्ट्रीय सेमीनारों का आयोजन किया जा चुका है। जिसमें देश-विदेश के प्रसिद्ध इतिहासकारों, प्रोफेसर्स, शोधार्थियों तथा विभिन्न अभिलेखागार के निदेशकों ने निम्नांकित विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किये-

  • वर्ष 2013-14 में “अभिलेखागारीय स्त्रोत एवं उसका महत्व”

  • वर्ष 2014-15 में “राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था”

  • वर्ष 2015-16 में “आजादी से पहले का राजस्थान”

  • वर्ष 2016-17 में ‘‘Glimpses of State and Society Through Archival Records'’

    वर्ष 2019 में अंतराष्ट्रीय सेमिनार सह कार्यशाला का आयोजन ''Persian and Rajasthani Documents with particular focus on RSA's Collection'' 6 फरवरी, 2019 को किया गया।

 

9. विभागीय जर्नल ''अभिलेख'' का प्रकाशन -

 

विभागीय जर्नल “अभिलेख” 1986 ई. में 9 अंक के प्रकाशन के पश्चात् बन्द हो गयी थी। इसे पुनः 26 वर्ष पश्चात् 2014 ई. में विभाग द्वारा आई.एस.बी.एन. नम्बर के साथ प्रारम्भ किया गया, जिससे देश-विदेश के शोधार्थी व आमजन लाभान्वित हो रहे हैं।

 

10. निजी अभिलेखों, शोधपरक एवं ऐतिहासिक सामग्री का निरिक्षण व सर्वेक्षण-

इसके अंतर्गत मुख्य कार्य प्रदेश में निजी अभिलेख धारकों के यहां उपलब्ध शोधपरक एवं ऐतिहासिक सामग्री का सर्वेक्षण करना है। साथ ही उक्त प्रकार के अभिलेखों को सहमति देने पर अभिलेखागार में अभिलेखों के अधिग्रहण का कार्य भी करता है। निरीक्षण  के  अन्तर्गत  राजस्थान  सरकार  के  विभिन्न  विभागों,  शासकीय  एवं अर्ध शासकीय  संस्थाओं  के  यहां  रखे हुये अभिलेखों  एवं  अभिलेख  कक्षों  का  व  अभिलेखों  के अवाप्ति, रख-रखाव  तथा  परिरक्षण  सम्बन्धी  निरीक्षण  का  कार्य  शामिल  हैे। इस  हेतु  विभाग प्रदेश  भर  में समय-समय  पर  इन  विभागों  एवं  संस्थाओं  से  तत्सम्बन्धित  पत्राचार  कर  एक निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करता है। इस रिपोर्ट में इन अभिलेखों के रख-रखाव एंव इनके संरक्षण हेतु तकनीकी सुझाव भी देता है।

11 . प्रशिक्षण कार्य -

अभिलेखागार द्वारा राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागोें में उनके अभिलेख कक्षों में कार्यरत कार्मिकों को अभिलेख व्यवस्था एवं उनके सरंक्षण सम्बन्धी प्रशिक्षण प्रदान करता है, ताकि विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण रिकाॅर्ड को पूर्ण सुरक्षा दी जा सके।

12. मौखिक इतिहास ध्वनिबद्ध करना -

अभिलेखागार द्वारा राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम के उन जीवित स्वाधीनता सेनानियों, जिन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन  में  अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, के  संस्मरणों  को  ध्वनिबद्ध  किया जा  रहा है। इन संस्मरणों को विभिन्न पुस्तकों में लेखबद्ध एवं प्रकाशित भी किया गया है। राजस्थान एवं राष्ट्र के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास लेखन के लिए ये संस्मरण अपने आप में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्त्रोत एवं साक्ष्य है। विभाग अभी तक विभिन्न अचलों पर आधारित स्वतंत्रता सेनानियों के संस्करणों पर आधारित छः पुस्तकों का प्रकाशन कर चुका है। स्वतंत्रता सेनानियों के ध्वनिबद्ध संस्मरणों की सी.डी. बनवाकर आमजन के लिये उपलब्ध करवाया गया है। राज्य के स्वतंत्रता व प्रजा मण्डल आंदोलन से संबंधित समस्त अभिलेखों का डिजिटाईजेशन व माइक्रोफिल्मिग की जा चुकी है।

13. प्रमुख विभागीय प्रकाशन -

प्रकाशन खण्ड द्धारा निम्नांकित सूची में अंकित विभागीय प्रकाशन निदेशालय, राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर एवं विभाग के सभी शाखा कार्यालयों में विक्रय हेतु उपलब्ध कराई गई है। प्रकाशनों का विवरण व उनका विक्रय मूल्य निम्नवत् है-

            

S. No

Particulars      

Amount (Rs.)

1A Descriptive List of Farmans, Manshures and Nishans address by the Imperial Mughalas to the Princess of Rajasthan (English) 196210.00 L.B. 12.00 S.B.
2

Rajasthan Throught the Ages Vol-I, Edited by Dr. Dashrath Sharma, Period from the earliest time to1316 A.D. (English) 196060.00
3

A Descriptive List of the Vakil Report persian addressed to the rulers of Jaipur Vol-I (English) 196710.00 L.B. 12.00 S.B.
4

 A Descriptive List of the Vakil Report persian addressed to the rulers of Jaipur Vol-II(English) 197210.00
5

Bijolia Kishan Andolan-ka-Itihas (Hindi) 197230.00
6

A Descriptive List of the Vakil Report address to the rules of Jaipur Rajasthani (English) 1974.14.00
7

A Descriptive List of the Arzdashts address to the Rulers of Jaipur, Rajasthani (English) Second Edition-199260.00
8

A Descriptive List of the Khattot Ahlakaran Rajasthani 1633 to 1769 A.D. (English) Second Edition-199236.00
9

A Descriptive List of Kharitas addressed to the Rulers of Jaipur by Jodhpur rules 1693 to 1946 (Hindi) 197710.00
10

A Descriptive List of Kharitas addressed by the Rulers of Gwaliar, Bikaner and Karauly to the rules of Jaipur, 1702 to 1799 A.D. 197726.00
11

A Descriptive List of the Bikaner Mahkmakhas English Record 1896 to 1914 A.D. (English) 198030.00
12

A Descriptive List of the Arzdashts (Persian) addressed by the various officials to the rulers of Jaipur 1658 to 1707 A.D. (English) 198142.00
13

A Descriptive List of the Arzdashts (Rajasthan) addressed by the rulers of Jaipur V.S. 1687 to 1743 (Hindi) 198154.00
14

A Descriptive List of the English Records of Ajmer Commissioner 1818 to 1889 A.D. (English) 1881.52.00
15

A Descriptive List of the Bikaner Bahis from 17th to 19th Century Part I (Hindi) 198290.00
16

A Descriptive List of the Jaipur Arzdashts Rajasthani V.S. 1743 to 1749 (Hindi) 198334.00
17

A Descriptive List of the English Records of the Jodhpur Mahkmakhas English 1884 to 1949 A.D. Vol. I, 1984140.00
18

A Descriptive List of the English Records Mahkmakhas Jaisalmer (English) 1891 to 1950 A.D. 198448.00
19

A Descriptive List of the Arzdashts addressed by th various officials (Rajasthani) to the rulers of the Jaipur (1750 to 1761 A.D. (Hindi) 198686.00
20

A Descriptive List of the Letters addressed to the rulers of Jodhpur 1769 to 2003 Part-I (Hindi) 198656.00
21

A Descriptive List of Kota, Bundi State Kharitas 1771 to 2000 V.S. (Hindi)26.00
22A Descriptive List of the Arzdashtas (Persian) addressed by the various Official to the rulers of Jaipur State 1707 to 1720 A.D. (English)64.00
23A Descriptive List of Jaipur Arzdashtas Rajasthani 1762 to 1775 V.S. (Hindi)52.00
24Swadhinta-Ke-Geet (Hindi).24.0056.00
25

A Descriptive List of Kharitas received by the Udaipur State from Kishangarh, Kota and Badhogarh (Rinwa) and Bikaner 1896 to 1950 V.S. (Hindi)24.00
26

A Descriptive List of the Bikaner Mahkmakhas English Records. Army Department 1914 to 1947 A.D. (English)136.00
27Khayat Das Derpan, History of Bikaner State (Hindi)116.00
28

A Descriptive List of the English Records of the Jodhpur Mahkmakhas 1893 to 1950 A.D. Vol. -II116.00
29Manual of Rajasthan State Archives (Hindi)108.00
30

Rajasthan Through the ages Vol.-II from 1300 to 1761 A.D. (English) (Dr. G. N. Sharma)292.00
31Rajasthan Swatantrata Sangram Ka Itihas (Hindi)230.00
32A Descriptive List of Jodhpur State Correspondence. 98.00
33Koormavilas-Histroy of the Khchhawaha Rulers of Jaipur (Hindi)164.00
34Guide to the Record in the Rajasthan State Archives (English)104.00
35A Descriptive List of the Paratapgarh Mahkmakhas English Records 1890 to 1950 A.D. English48.00
36A Descriptive List of the Chief Commissioner Office Ajmer (Gen. Branch) 1948-1952 (English)82.00
37A List of Bundi English Record 1901 -1946 A.D. (English).78.00
38Rajasthan Swadhinta Sangram-Ke-Sakshi, Kuchh Samsmarana, Udaipur, Dungarpur, Banswara120.00
39Rajasthan Thruoght the Ages Vol.III (M.S. Jain)292.00
40Vivaran Suchi Kharita Munshi Khana Jodhpur Vol-I 1843 to 1895 A.D.     -
41Vivaran Suchi Kharita Munshi Khana Jodhpur Vol-II 1895 to 1846 A.D.     -
42Rajasthan Sawatantra Sangram ke sakhi kuch sansmaren Bharatpur, Alwar, Karoli, Dholpur Part-II280.00
43Jan-Andolan Granthmala, Rajasthan Sawatantra Sangram ke sakhi kuch sansmaren Ajmer    -
44A Biography of His Highness Maharaja Shri Ganga Singh Ji    -
45A Descriptive List of the Akhbar Darbar-E-Mulla Jalus 9 Alamgiri 166-67.    -
46Ex. Director Late Sh. Nathuram Khadgawat Rajasthan Roll in the Struggle of 1857 Re-Print.123.00
47Rajasthan Sawatantra Sangram ke sakhi kuch sansmaren Haroti Anchal159.00
48Rajasthan Sawatantra Sangram ke sakhi kuch sansmaren Jodhpur Anchal219.00
49Farasi Farmano ke Parkash mai Mugalkalain Bhart va Rajput sashak1033.00
50Rajasthan Sawatantra Sangram ke sakhi kuch sansmaren Jaipur Anchal394.00
51Farsi Farmano ke prakash me mungalkalin bharat va Rajput sashak1276

Historian Award 2019



Historian of the year award given to Professor Ramya Srinivasan, Professor of University of Pennsylvania USA in the memory of Late Sh. Badri Narayan Thanvi. In this award momento and cash 11000 rupees were given to the awarded by the Thanvi Family.

7 टिप्पणियाँ:


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