7/18/2012 05:43:00 am
2
आधुनिक राजस्थान के निर्माता के रूप में लोकप्रिय 'पूर्व मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाड़िया' का जन्म 31 जुलाई 1916 को झालावाड़ में एक जैन परिवार में हुआ था। उनके पिता श्री पुरुषोत्तम लाल सुखाडिया एक क्रिकेटर थे जो बॉम्बे तथा सौराष्ट्र की टीम से खेले थे। नाथद्वारा तथा उदयपुर में प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात वे इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के लिए मुंबई चले गए जहाँ वे छात्र राजनीति से जुड़े तथा अपने कॉलेज के महासचिव बने। वहाँ वो छात्र हितों के लिए लगातार सक्रिय रहे। इसी दौरान वे प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं यथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, युसुफ मेहेरली तथा अशोक मेहता आदि के संपर्क में आए। वे सरदार पटेल के नेतृत्व में होने वाली कांग्रेस की बैठकों में नियमित रूप से शरीक होते थे। नाथद्वारा लौटने पर उन्होंने इलेक्ट्रिकल का छोटा सा प्रतिष्ठान प्रारंभ किया। यही प्रतिष्ठान उनकी स्वाधीनता आंदोलन के लिए युवा मित्रों की बैठकों व गतिविधियों का केन्द्र बना। यहाँ वे ब्रिटिश शासन की तानाशाही व अनियमिताओं के अलावा इलाके में सामाजिक-आर्थिक सुधार पर चर्चा करते थे। उन्होंने तथा उनके साथियों ने इस हेतु शिक्षा व सामाजिक जागरूकता के विभिन्न कार्यक्रम भी संचालित किए। श्री सुखाड़िया वास्तव में समाज सुधारक थे। वे छुआछूत के केवल विरोधी ही नहीं थे अपितु उस समय उन्होंने स्वयं अंतर्जातीय करके एक क्रांतिकारी कदम उठाया। 1 जून 1965 को उनका यह विवाह इंदुबाला सुखाड़िया से ब्यावर में आर्य समाज की वैदिक रीति से संपन्न हुआ जिसका उनके गृह नगर नाथद्वारा में उनकी माता, परिजनों व समाज के लोगों ने विरोध किया किंतु उनके मित्रों ने उनका भरपूर सहयोग किया। मित्रों ने समाज के विरोध के बावजूद नगर में नवविवाहित जोड़े का बग्गी में जुलूस निकाला और शानदार स्वागत किया।
वे प्रसिद्ध स्वाधीनता सेनानी माणिक्य लाल वर्मा और पंडित जवाहर लाल नेहरू से बहुत प्रभावित थे। उन्हीं से प्रेरणा पाकर वे युवावस्था में ही स्वाधीनता आंदोलन में पूर्ण सक्रिय होने के लिए मेवाड़ प्रजामंडल के सदस्य बने तथा उदयपुर आ गए। नवंबर 1941 में मेवाड़ प्रजामंडल के माणिक्य लाल वर्मा की अध्यक्षता में हुए प्रथम अधिवेशन में उत्तरदायी शासन की स्थापना करने तथा नागरिक अधिकार देने की माँग की गई। इस अवसर पर हरिजनों के कल्याण के लिए 'हरिजन सेवा संघ' की स्थापना की गई तथा इसका कार्यभार मोहन लाल सुखाड़िया को सौंपा गया। भारत छोड़ो आंदोलन व प्रजामंडल के विभिन्न कार्यक्रमों तथा आंदोलनों में सक्रियता से भाग लेने के कारण वे जल्दी ही लोकप्रिय नेता बन गए। प्रजामंडल के आंदोलन के कारण मेवाड़ के महाराणा को झुकना पड़ा तथा राज्य में संवैधानिक सुधार करने पड़े। इन्हीं सुधारों के तहत मेवाड़ में व्यवस्थापिका के चुनाव से पूर्व अंतरिम मंत्रिमंडल का गठन किया जिसमें मेवाड़ प्रजामंडल के नेता मोहन लाल सुखाड़िया व हीरालाल कोठारी को 28 मई, 1947 को मंत्री पद पर नियुक्त किया गया तथा फरवरी 1948 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद भी वे मंत्री रहे। देश की स्वाधीनता के बाद वे मेवाड़ राज्य में और तत्पश्चात अप्रैल 1948 में गठित संयुक्त राजस्थान की सरकार में मंत्री पद पर रहे। 30 मार्च 1949 को बने 'वृहद राजस्थान' के हीरा लाल शास्त्री के मुख्यमंत्रित्व में गठित सरकार में तो वे मंत्री नहीं बन पाए किंतु 1952 में जब जय नारायण व्यास मुख्यमंत्री थे तब वे उनके मंत्रिमंडल में शामिल किए गए। 13 नवंबर 1954 को राज्य के इतिहास का वह प्रमुख क्षण था जब राज्य के लोकप्रिय नेता मोहन लाल सुखाड़िया ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उन्होंने लगातार 17 वर्ष अर्थात 13 नवंबर, 1954 से 9 जुलाई, 1971 तक इस पद पर बने रहने का कीर्तिमान स्थापित किया। उनसे पूर्व राज्य के मुख्यमंत्री जय नारायण व्यास थे जबकि उनके पश्चात बरकतुल्लाह खाँ इस पद पर रहे। राजस्थान का यह दूरदर्शी समाज सेवी राजनेता सन् 1954 में जब राज्य के मुख्यमंत्री पद पर आरूढ़ हुआ तब उनकी उम्र मात्र 38 वर्ष थी। इस समय राज्य की स्थिति बहुत खराब थी। उन्होंने अपने 17 वर्षों के कुशल नेतृत्व से राज्य में कई सामाजिक, शैक्षिक व आर्थिक सुधार किए तथा राज्य को पिछड़े राज्य से एक विकासशील राज्य की ओर अग्रसर किया। इसी कारण उन्हें "आधुनिक राजस्थान का निर्माता (Founder of Modern Rajasthan)" कहा जाता है। राजस्थान के इस जनप्रिय नेता ने कर्नाटक, आंध्रप्रदेश तथा तमिलनाडु के राज्यपाल के पद को भी सुशोभित किया।
समूचा राजस्थान उस समय स्तब्ध रह गया जब इस महान सपूत का देहावसान 2 फरवरी 1982 को बीकानेर में हो गया। उदयपुर में उनका दाह संस्कार किया गया तथा जिस स्थान पर उनका दाह संस्कार हुआ उस जगह समाधि बनाई गई जिस पर कृतज्ञजन स्वाधीनता के इस सेनानी व विकास के पुरोधा को पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।

2 टिप्पणियाँ:

  1. javahar lal nehru ne aisa kya kiya jo ye inse prabhavit hue

    ReplyDelete
  2. वो जवाहर लाल नेहरू द्वारा स्वाधीनता आंदोलन में किए गए योगदान से प्रभावित थे।

    ReplyDelete

Your comments are precious. Please give your suggestion for betterment of this blog. Thank you so much for visiting here and express feelings
आपकी टिप्पणियाँ बहुमूल्य हैं, कृपया अपने सुझाव अवश्य दें.. यहां पधारने तथा भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार

स्वागतं आपका.... Welcome here.

राजस्थान के प्रामाणिक ज्ञान की एकमात्र वेब पत्रिका पर आपका स्वागत है।
"राजस्थान की कला, संस्कृति, इतिहास, भूगोल और समसामयिक दृश्यों के विविध रंगों से युक्त प्रामाणिक एवं मूलभूत जानकारियों की एकमात्र वेब पत्रिका"

"विद्यार्थियों के उपयोग हेतु राजस्थान से संबंधित प्रामाणिक तथ्यों को हिंदी माध्यम से देने के लिए किया गया यह प्रथम विनम्र प्रयास है।"

राजस्थान सम्बन्धी प्रामाणिक ज्ञान को साझा करने के इस प्रयास को आप सब पाठकों का पूरा समर्थन प्राप्त हो रहा है। कृपया आगे भी सहयोग देते रहे। आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत है। कृपया प्रतिक्रिया अवश्य दें। धन्यवाद।

विषय सूची

Rajasthan GK (432) राजस्थान सामान्य ज्ञान (373) Current Affairs (254) GK (240) सामान्य ज्ञान (157) राजस्थान समसामयिक घटनाचक्र (129) Quiz (126) राजस्थान की योजनाएँ (106) समसामयिक घटनाचक्र (103) Rajasthan History (90) योजनाएँ (85) राजस्थान का इतिहास (52) समसामयिकी (52) General Knowledge (45) विज्ञान क्विज (40) सामान्य विज्ञान (34) Geography of Rajasthan (32) राजस्थान का भूगोल (30) Agriculture in Rajasthan (25) राजस्थान में कृषि (25) राजस्थान के मेले (24) राजस्थान की कला (22) राजस्थान के अनुसन्धान केंद्र (21) Art and Culture (20) योजना (20) राजस्थान के मंदिर (20) Daily Quiz (19) राजस्थान के संस्थान (19) राजस्थान के किले (18) Forts of Rajasthan (17) राजस्थान के तीर्थ स्थल (17) राजस्थान के प्राचीन मंदिर (17) राजस्थान के दर्शनीय स्थल (16) राजस्थानी साहित्य (16) अनुसंधान केन्द्र (15) राजस्थान के लोक नाट्य (15) राजस्थानी भाषा (13) Minerals of Rajasthan (12) राजस्थान के हस्तशिल्प (12) राजस्थान के प्रमुख पर्व एवं उत्सव (10) राजस्थान की जनजातियां (9) राजस्थान के लोक वाद्य (9) राजस्थान में कृषि योजनाएँ (9) राजस्थान में पशुधन (9) राजस्थान की चित्रकला (8) राजस्थान के कलाकार (8) राजस्थान के खिलाड़ी (8) राजस्थान के लोक नृत्य (8) forest of Rajasthan (7) राजस्थान के उद्योग (7) राजस्थान सरकार मंत्रिमंडल (7) वन एवं पर्यावरण (7) शिक्षा जगत (7) राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार (6) राजस्थान की झीलें (5) राजस्थान की नदियाँ (5) राजस्थान की स्थापत्य कला (5) राजस्थान के ऐतिहासिक स्थल (5) Livestock in Rajasthan (4) इतिहास जानने के स्रोत (4) राजस्थान की जनसंख्या (4) राजस्थान की जल धरोहरों की झलक (4) राजस्थान के संग्रहालय (4) राजस्थान में जनपद (4) राजस्थान में प्रजामण्डल आन्दोलन (4) राजस्थान रत्न पुरस्कार (4) राजस्थान सरकार के उपक्रम (4) राजस्थान साहित्य अकादमी (4) राजस्थानी साहित्य की प्रमुख रचनाएं (4) विश्व धरोहर स्थल (4) DAMS AND TANKS OF RAJASTHAN (3) Handicrafts of Rajasthan (3) राजस्थान की वन सम्पदा (3) राजस्थान की वेशभूषा (3) राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएँ (3) राजस्थान के आभूषण (3) राजस्थान के जिले (3) राजस्थान के महोत्सव (3) राजस्थान के राज्यपाल (3) राजस्थान के रीति-रिवाज (3) राजस्थान के लोक संत (3) राजस्थान के लोक सभा सदस्य (3) राजस्थान में परम्परागत जल प्रबन्धन (3) Jewelry of Rajasthan (2) पुरस्कार (2) राजस्थान का एकीकरण (2) राजस्थान की उपयोगी घासें (2) राजस्थान की मीनाकारी (2) राजस्थान के अधात्विक खनिज (2) राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्र (2) राजस्थान के जैन तीर्थ (2) राजस्थान के प्रमुख शिलालेख (2) राजस्थान के महल (2) राजस्थान के लोकगीत (2) राजस्थान बजट 2011-12 (2) राजस्थान मदरसा बोर्ड (2) राजस्थान में गौ-वंश (2) राजस्थान में पंचायतीराज (2) राजस्थान में प्राचीन सभ्यताएँ (2) राजस्थान में मत्स्य पालन (2) राजस्‍व मण्‍डल राजस्‍थान (2) राजस्थान का खजुराहो जगत का अंबिका मंदिर (1) राजस्थान का मीणा जनजाति आन्दोलन (1) राजस्थान की स्थिति एवं विस्तार (1) राजस्थान के कला एवं संगीत संस्थान (1) राजस्थान के चित्र संग्रहालय (1) राजस्थान के तारागढ़ किले (1) राजस्थान के धरातलीय प्रदेश (1) राजस्थान के धात्विक खनिज (1) राजस्थान के विधानसभाध्यक्ष (1) राजस्थान के संभाग (1) राजस्थान के सूर्य मंदिर (1) राजस्थान दिव्यांगजन नियम 2011 (1) राजस्थान निवेश संवर्धन ब्यूरो (1) राजस्थान बार काउंसिल (1) राजस्थान में चीनी उद्योग (1) राजस्थान में प्रथम (1) राजस्थान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक (1) राजस्थान में यौधेय गण (1) राजस्थान में वर्षा (1) राजस्थान में सडक (1) राजस्थान राज्य गैस लिमिटेड (1) राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (1) राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (1) राजस्थान सुनवाई का अधिकार (1) राजस्थानी की प्रमुख बोलियां (1) राजस्थानी भाषा का वार्ता साहित्य (1) राजस्थानी साहित्य का काल विभाजन- (1) राजस्‍थान राज्‍य मानव अधिकार आयोग (1) राज्य महिला आयोग (1) राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र बीकानेर (1) सिन्धु घाटी की सभ्यता (1)
All rights reserve to Shriji Info Service.. Powered by Blogger.

Disclaimer:

This Blog is purely informatory in nature and does not take responsibility for errors or content posted in this blog. If you found anything inappropriate or illegal, Please tell administrator. That Post would be deleted.