12/29/2020 06:07:00 pm
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राजस्थान की इन्दिरा रसोई योजना हिंदी में | Indira Rasoi Yojana Rajasthan in Hindi 

राजस्थान सरकार  के “कोई भूखा ना सोए” के संकल्प के साथ स्व. श्रीमती इन्दिरा गाँधी के नाम पर राजीव गाँधी की जयन्ती 20 अगस्त 2020 पर शुरू की गई। इन्दिरा रसोई योजना के माध्यम से राज्य में साढे़ तीन माह की अल्प अवधि में ही एक करोड़ से अधिक लाभार्थियों को खाना खिलाने का आंकड़ा छू लिया है।

  • प्रदेश भर के सभी 213 नगरीय निकायों में इंदिरा रसोई योजनान्तर्गत 358 स्थाई रसोईयां स्थापित की गई है, जहां लाभार्थी 8 रुपये में बैठकर भोजन कर सकता है। 

  • भोजन में मुख्यतः दाल, सब्जी, आचार व चपाती है। 

  • नगर पलिका एवं नगर परिषद क्षेत्रों में प्रतिदिन भोजन सीमा 300 थाली एवं नगर निगम क्षेत्र में प्रतिदिन 600 थाली प्रति रसोई प्रतिदिन है एवं आवश्यकता होने इसे 100 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। 

  • इन्दिरा रसोई योजना राज्य में प्रतिदिन की भोजन क्षमता 1,33,500 है। वहीं वार्षिक 4.87 करोड़ लंच/डीनर वितरित करने का लक्ष्य रखा है। जिस पर प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये व्यय होगा।



जिला स्तरीय समन्वय एवं मॉनिटरिंग समिति-

 
  • इन्दिरा रसोई योजना Indira Rasoi Yojana के तहत सभी जिलो में जिला कलक्टरों की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समन्वय एवं मॉनिटरिंग समिति का गठन किया गया है। 

  • जिला स्तरीय समिति द्वारा इंदिरा रसोई संचालन के लिए क्षेत्रीय प्रतिष्ठित एन. जी. ओ. का चयन किया गया है, इन्हीं एन. जी. ओ. के मार्फत “ना लाभ ना हानि” के आधार पर रसोइयों का संचालन किया जा रहा है। 

  • इन्दिरा रसोई योजना रसोई संचालक (एन.जी.ओ.) को प्रति थाली 20 रुपये प्राप्त होते है, इनमें से 8 रुपये लाभार्थी से व 12 रुपये राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त होता है। 

  • जिलावार निर्धारित लक्ष्य से अधिक भोजन कराने वाले जिलों में प्रतापगढ 127 प्रतिशत, बांसवाडा 125 प्रतिशत एवं बाडमेर 107 प्रतिशत है। 

  • नगर निगम क्षेत्रों में बीकानेर 78 प्रतिशत एवं जोधपुर साउथ 74 प्रतिशत के साथ सर्वोपरि है। 


रसोई हेतु आधारभूत एवं आवर्ती व्यय 


  • रसोई संचालन के लिए राज्य सरकार द्वारा न केवल राजकीय भवन उपलब्ध कराये गए है, वरन रसोई संचालन हेतु प्रत्येक रसोई में आधारभूत व्यय के पेटे 5 लाख रुपये व्यय कर फर्नीचर, बर्तन, फ्रिज, वाटर कूलर, आटा गूंदने की मशीन, वाटर प्यूरीफायर, कम्प्यूटर, गैस, बिजली, पानी कनेक्शन, इण्टरनेट कनेक्शन इत्यादि उपलब्ध कराये गए है। 

  • सरकार द्वारा प्रति रसोई प्रतिवर्ष आवर्ती व्यय के पेटे 3 लाख रुपये उपलब्ध कराये गये हैं, जिनमें से कम्प्यूटर ऑपरेटर, बिजली पानी, इंटरनेट आदि पर होने वाला व्यय सरकार वहन करती है। 

  • साथ ही इसी व्यय से रसोई में कार्य करने वाले स्टाफ की ड्रेस, बर्तन, फर्नीचर के खराब होने पर नया लेने का भी प्रावधान है।


रसोइयों में सूचना एवं प्रौद्योगिकी का व्यापक प्रयोग 


  • इंदिरा रसोइयों में आईटी का बेहतर ढंग से उपयोग किया गया है। लाभार्थी के रसोई में प्रवेश करते ही उसका स्वतः ही फोटो खिंच जाता है एवं उसका नाम एवं मोबाईल नम्बर कम्प्यूटर में फीड कर वेब पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। इसके पश्चात लाभार्थी को तुरंत मोबाईल पर मैसेज आता है कि इंदिरा रसोई में पधारकर भोजन ग्रहण करने के लिए आपका धन्यवाद। 

  • इस मैसेज में मोबाईल पर कोविड गाईडलाइन का पालन करने का भी आग्रह किया जाता है।

  • वेब पोर्टल पर लाभार्थी एवं समस्त 358 रसोइयों का डाटा पब्लिक डोमेन में रहता है जिसे कोई भी व्यक्ति लाईव देख सकता है। 

  • वेब पोर्टल एवं वेबसाईट पर लाभार्थियों की संख्या, पुरूष, महिला, आयुवार लाईव काउन्टर रहता है, जिसमें पल-पल की सूचना प्रदर्शित होती रहती है। 

  • लाभार्थियों को स्वायत्त शासन विभाग के कॉल सेन्टर एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के राज्य स्तरीय कॉल सेन्टर से फोन कर भोजन की गुणवता आदि के बारे में सुझाव लिया जाता है।


रसोई संचालकों को ऑनलाईन भुगतान


  • इन्दिरा रसोई योजना Indira Rasoi Yojana  के स्टेट नोडल ऑफिसर के अनुसार रसोई संचालकों को देय राजकीय अनुदान के मासिक भुगतान की विशेष व्यवस्था की गई है। रसोई संचालकों द्वारा पोर्टल पर सिंगल क्लिक से ऑनलाईन बिल जनरेट किया जाता है एवं यूआईडी पोर्टल के माध्यम से आधार ऑथेन्टिकेट किया जाता है और बिल को ऑनलाईन ही बिना भौतिक हस्ताक्षर किए ऑनलाईन सॉफ्ट कॉपी में सम्बन्धित नगरीय निकाय को भुगतान हेतु भेज दिया जाता है। 

  • नगरीय निकाय में सम्बन्धित रसोई संचालक को भुगतान हेतु नोटशीट भी ऑनलाईन तैयार हो जाती है। इसके पश्चात सम्बन्धित नगरीय निकाय द्वारा रसोई संचालक को ऑनलाईन सीधे बैंक खाते में भुगतान हस्तांरित हो जाता है।

  • इस पूरी प्रक्रिया में समस्त थालियों की गणना ऑनलाईन स्वतः होकर इनवॉइस जनरेट होता है, रसोई संचालक को कहीं भी हस्ताक्षर नहीं करने पड़ते और ना ही बिल लेकर नगरीय निकाय में जाना पड़ता है। भुगतान प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी है।

रसोईयों की संख्या-


रसोईयों की संख्या

क्षेत्र

संख्या

रसोई संख्या

विवरण

नगर निगम

10

87

जयपुर 20. कोटा, जोधपुर 16, अजमेर, बीकानेर, जयपुर-10 एवं भरतपुर 5

नगर परिषद्

34

102

3 रसोई प्रति नगर परिषद्

नगर पालिका

169

169

1 रसोई प्रति नगर पालिका

योग

213

358


रसोईयों में जनसहभागिता -
इन्दिरा रसोई में योगदान कैसे दिया जा सकता है? 

राज्य में अनेक इन्दिरा रसोइयां ऎसी भी है, जिनमें रसोई संचालक द्वारा लाभार्थी अंश अथवा राज्य सरकार से किसी प्रकार का अनुदान नहीं लिया जा रहा है, बल्कि रसोई संचालक अपने स्तर पर लाभार्थियों को खाना खिलाते है।

इंदिरा रसोई में कोई भी व्यक्ति एक या एक से अधिक समय का खाना प्रायोजित कर लाभार्थियों को मुफ्त में खाना खिला सकता है। इसके लिए उसे किसी भी इन्दिरा रसोई में जाकर पैसा जमा कराना होता है, सम्बन्धित व्यक्ति के पास मोबाइल एवं ईमेल पर मैसेज आता है एवं प्रायोजित दिन के भोजन के समय प्रत्येक कूपन पर यह मैसेज लिखा आता है कि “आज का खाना श्री.... द्वारा प्रायोजित है। प्रायोजक व्यक्ति को स्थानीय निकाय विभाग का प्रशस्ति पत्र भी दिया जाता है। राज्य में अब तक 1 हजार 898 व्यक्तियों द्वारा इन्दिरा रसोई में लोगों के लिए भोजन प्रायोजित किया गया है।
 

इन्दिरा रसोई में संस्था/कॉर्पोरेट/फर्म द्वारा योगदान कैसे दिया जा सकता है?

इन्दिरा रसोई योजना Indira Rasoi Yojana में संस्था/कॉर्पोरेट/फर्म आर्थिक सहयोग भी कर सकती है। दान/सहयोग मुख्यमंत्री सहायता कोष अथवा रजिस्टर्ड जिला स्तरीय इंदिरा रसोई के बैंक खाते में ही किया जा सकेगा। औद्यौगिक/व्यापारिक संस्थान सीएसआर फण्ड से सहयोग कर सकते हैं, तथा ये संस्थान एक या अधिक इंदिरा रसोई के संपूर्ण सचालन का जनसहभागिता के आधार पर उत्तरदायित्व ले सकते हैं।
 

भोजन की गुणवत्ता सही नहीं होने पर कहॉं शिकायत कर सकते हैं?

भोजन की गुणवत्ता सही नहीं पाये जाने पर सम्बन्धित नगरीय निकाय, जिला कलेक्टर को लिखित में शिकायत कर सकते हैं अथवा स्वायत्त शासन विभाग के टोलफ्री नं. 18001806127 पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
 


इन्दिरा रसोई योजना विशेषताएं -
  • इंदिरा रसोई में लाभार्थी को 8 रूपये में शुद्ध, ताजा एवं पोष्टिक भोजन।
  • इंदिरा रसोई में स्थाई रसोड़ो में सम्मानपूर्वक एक स्थान पर बैठाकर भोजन व्यवस्था।
  • राज्य सरकार द्वारा 12 रूपये प्रति थाली अनुदान
  • योजना हेतु प्रतिवर्ष 100 करोड रूपये का प्रावधान
  • प्रतिदिन 1.34 लाख व्यक्ति एवं प्रतिवर्ष 4.87 करोड़ लोगां को लाभान्वित करने का लक्ष्य। आवश्यकता के अनुरूप इसे और बढ़ाया जा सकता है।
  • सामान्यतः दोपहर का भोजन प्रातः 8:30 बजे से मध्यान्ह 1:00 बजे तक एवं रात्रिकालीन भोजन सांयकाल 5:00 बजे से 8:00 बजे तक उपलब्ध कराया जायेगा।
  • भोजन मेन्यू में मुख्य रूप से प्रति थाली 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, 250 ग्राम चपाती एवं आचार सम्मिलित है।
  • यह  पूर्णतः केन्द्रीकृत नहीं है और इसमें एक ही ठेकेदार को सम्पूर्ण कार्य नहीं दिया गया है बल्कि इंदिरा रसोई योजना पूर्णतः विकेन्द्रीकृत है, इसका संचालन 350 से अधिक स्थानीय प्रतिष्ठित संस्थाओं एन.जी.ओ. के माध्यम से संचालन किया जा रहा है। इन एन.जी.ओ. का चयन भी जिला कलक्टर की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समन्वय एवं मॉनिटरिंग समिति द्वारा किया गया है। 
  • इन्दिरा रसोई में 12 रुपये प्रति थाली राजकीय अनुदान है। 
  • इंदिरा रसोई में दानदाता को लाभार्थी का अंशदान व राजकीय अनुदान दोनों देना होता है।
  • इंदिरा रसोई मोबाइल ऐप के आधार पर मॉनिटरिंग का प्रावधान किया गया है।

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