11/10/2018 08:32:00 pm
0

कैसे करें मोठ की खेती -

दलहनी फसलों में मोठ सर्वाधिक सूखा सहन करने वाली फसल है। असिंचित क्षेत्रों के लिए यह फसल लाभदायक है। राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, देश के प्रमुख मोठ उत्पादक राज्य हैं। फसल स्तर बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-2015) के अन्तर्गत भारत में मोठ का कुल क्षेत्रफल 9.26 लाख हेक्टेयर व उत्पादन 2.77 लाख टन था। राजस्थान देश में मोठ ऊत्पादन में प्रथम स्थान पर है। राजस्थान में मोठ का क्षेत्रफल (96.75 प्रतिशत) उत्पादन (94.49%) सर्वाधिक है। इसके बाद गुजरात का स्थान (2.38% व 3.6%) आता है। यद्यपि राजस्थान की उपज (292 किग्रा./हेक्टेयर) राष्ट्रीय औसत उपज (299 कि.ग्रा./हेक्टेयर) से कम है।

मोठ के लिए उपयुक्त जलवायु -

मोठ की फसल बिना किसी विपरीत प्रभाव के फूल व फली अवस्था में उच्च तापमान को सहन कर सकती है और इसके वृद्धि व विकास 0 0 के लिये 25 -37 सेन्टीग्रेड तापक्रम की आवश्यकता होती है। वार्षिक वर्षा 250-500 मि.मी. व साथ ही उचित निकास की आवश्यकता होती है। 

मोठ की उन्नत प्रजातियाॅं -

राज्यवार प्रमुख प्रजातियों का विवरण  -                                                         

राज्यप्रजातियाॅं
राजस्थानआर.एम.अ¨.-257, आर.एम.अ¨.-435, आर.एम.ओ.-2004 (आर.एम.बी.25), आर.एम.ओ.-225, आर.एम.ओ.-40, एफ.एम.एम. 96, मोठ 880, ज्वाला, काजरी मोठ-2 (सी.जेड.एम. 45), काजरी मोठ-3 (सी.जेड.एम. 99), टी.एम.वी. (एम.बी.-1)
गुजरातजी.एम.ओ.- 1, जी.एम.ओ.- 2, ), मारू बहार (आर.एम.ओ.-435)
महाराष्ट्रकाजरी मोठ-2 (सी.जेड.एम. 45), काजरी मोठ-3 (सी.जेड.एम.99), मारू बहार (आर.एम.ओ.-435)
हरियाणाकाजरी मोठ-2 (सी.जेड.एम. 45), काजरी मोठ-3 (सी.जेड.एम. 99)

अन्य प्रजातियां -

आर.एम.ओ.-257, आर.एम.ओ.-423, आर.एम.ओ.-435, जे.एम.वी.-1, सी.ऐ.जेड.आर.ई.-2, सी.ऐ.जेड.आर.ई.-3,

उपज अन्तर-

सामान्यतः यह देखा गया है कि अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन की पैदावार व स्थानीय किस्मों की उपज में 20-45% का अन्तर है। यह  अन्तर कम करने के लिये अनुसंधान संस्थानों व कृषि विज्ञान केन्द्र की अनुशंसा के अनुसार उन्नत कृषि तकनीक को अपनाना चाहिए।

भूमि का चुनाव -

अच्छे जल निकास व उच्च उर्वरता वाली दोमट भूमि सर्वोत्तम रहती है। भूमि में जल निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। खेत में पानी का ठहराव फसल को भारी हानि पहुंचाता है।

खेत की तैयारी -

खेत को दो बार कल्टीवेटर या हैरो से जुताई कर पाटा लगाकर खेत समतल कर लेना चाहिए।

बुआई समय -

जून के तीसरे सप्ताह से लेकर जुलाई के पहले पखवाड़े तक या मानसून प्रारम्भ होने के तुरन्त बाद कर देना चाहिए। उड़द व मूॅंग की तरह पंक्तियों में निर्धारित गहराई पर सीड ड्रिल या चोंगा द्वारा बुआई करने पर पर्याप्त पौध संख्या प्राप्त की जा सकती है।

उर्वरक -

प्रति हेक्टर 10-20 कि.ग्रा नाइट्रोजन, 40 कि.ग्रा फास्फोरस की आवश्यकता होती है। सभी उर्वरकों को आधार उर्वरक के रूप में देना चाहिए।

बीजोपचार -

मृदाजनित रोगों से बचाव के लिए बीजों को 2 ग्राम थीरम व 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति कि.ग्रा अथवा 3 ग्राम थीरम प्रति कि.ग्रा. की दर से उपचार करें। फफूंदनाशी दवा के उपचार के बाद बीजों को राइजोबियम व पी.एस.बी कल्चर 5-7 ग्राम मात्रा प्रति कि.ग्रा. बीज के हिसाब से उपचारित करें।

फसल अंतराल  -

पंक्ति से पंक्तिः 30-45 से.मी. ; पौध से पौध: 10 -20 से.मी

बीजदर -

  • 1. शुद्ध फसल के लिए 10-15 कि.ग्रा/हे. (पंक्तियों में बुआई करने पर)।
  • 2. मिश्रित खेती के लिए 4-5 कि.ग्रा/हे.।
  • 3. चारे की खेती के लिए 20-25 कि.ग्रा/हे.।

सिंचाई -

चूॅंकि यह फसल असिंचित दशा में बोई जाती है लम्बे समय तक वर्षा न हो तो दाना बनते समय एक सिंचाई करना फायदेमन्द होता है।

खरपतवार नियंत्रण

बुआई के 25 से 30 दिन तक खरपतवार फसल को अत्यधिक नुकसान पहुंचाते हैं बुआई से एक-दो दिन पश्चात पेन्डीमिथालीन की 0.75-1 कि.ग्रा सक्रिय तत्व की मात्रा को 400-600 लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टेयर में छिड़काव करना लाभप्रद रहता है। बुवाई के 25-30 दिन बाद एक निंदाई कर देनी चाहिए

फसल सुरक्षा एवं रोग प्रबंधन -

रस चूसक कीट-

नियन्त्रण के उपाय - रस चूसक कीट जैसे जैसिड, सफेद मक्खी, थ्रिप्स, माहू इत्यादि के नियंत्रण के लिये जल्दी बुवाई करें। फसल पर किसी एक कीटनाशी जैसे डायमिथिएट 30ई.सी. का 1.7 मि.ली./ली. या थायोमेथोक्जम 25 डब्लू.जी. का 0.2 ग्रा./ली. या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. का 0.2 मि.ली./ली. पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

दीमक व सफेद ग्रब -

यह भूमिगत कीट है जो पौधे की जडे़ं काटकर नुकसान पहुँचाते हैं। अच्छी प्रकार पकी हुई गोबर की खाद का ही उपयोग करें मृदा में फोरेट 10जी को 10 कि.ग्रा./हे. या क्लोरोपायरीफाॅस 1.5% चूर्ण 20-25 कि.ग्रा./हे. की दर से बुवाई के पूर्व खेत में देना चाहिए।

जीवाणु पत्ती धब्बा या झुलसाः

इस रोग के कारण पत्तियों पर छोटे, बडे व अनियमित आकार के भूरे धब्बे दिखाई देते हैं तथा रोग की तीव्रता की दशा में पत्तियाँ गिर जाती है। इस रोग के नियंत्रण के लिए बीजों को बुवाई के पूर्व बीजों को स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के 500 पी.पी.एम. (0.5 ग्रा./ली.) घोल में बीजो को 30 मिनट के लिये भिगा कर रखें। इसके बाद खड़ी फसल में स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 0.01% (1ग्रा./10 ली.) व काॅपर आक्सीक्लोराइड 3 ग्रा./ली. के हिसाब से घोल बनाकर 12 दिन के अन्तराल पर छिडकाव करें।

पीला मोजेक रोग

इस रोग के नियन्त्रण के लिए डायमिथिएट 30 ई.सी. का 1.7 मि.ली./ली. या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल का 0.2 मि.ली./ली. पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें तथा 15 दिन बाद दोबारा छिड़काव करें।

फली छेदक - 

यह कीट फसल के पौधों की पत्तियों को खाकर फसल को नुकसान पहुंचाता है। इसकी रोकथाम के लिए मोनोक्रोटोफास 36 डब्ल्यू एसी सी या मैलाथियोन 50 ई.सी. या क्यूनालफांस 25 ई.सी. आधा लीटर या क्यूनालफांस 1.5 प्रतिशत  पाउडर की 20-25 किलो मात्रा प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव/भुरकाव करना चाहिए । जरूरत पड़ने पर 15 दिन के बाद दूसरा छिड़काव/भुरकाव किया जा सकता है।

 कातरा - 

कातरे की लट फसल की प्रारम्भिक अवस्था में पौधों को काटकर हानि पहुंचाती हैं । इसके नियंत्रण के लिए खेत के चारों तरफ कर क्षेत्र साफ रहना चाहिए तथा लट के प्रकोप होने पर मिथाइल पैराथियोन पाउडर की 20-25 कि.ग्रा. मात्रा प्रति हैक्टेयर की दर से प्रयोग करनी चाहिए।

सरस्कोस्पोरा रोग -  

इस रोग के कारण पत्तियों पर कोणदार भूरे लाल रंग के धब्बे बन जाते है। रोग पौधों की नीचे की पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगती है तथा पौधों की जड़ें भी सूख जाती है । इस रोग के नियंत्रण के लिए कार्बेन्डाजिम की 500 ग्राम मात्रा 500 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। बीज को बुवाई से पूर्व 3 ग्राम कैप्टान या 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करना चाहिए।

जैसीडस -

यह कीट हरे रंग का होता है तथा पौधों की पत्तियों से रस चूस कर फसल को नुकसान पहुंचाता है। पत्तियां मुड़ी-सी लगने लगती हैं । इस कीट के नियंत्रण के लिए मोनोक्रोटोफास की आधा लीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। इमिडाक्लोप्रिड की 500 मि.ली. मात्रा को 500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है।  

मोयला, हरा तेला व मक्खी:-

इन कीटों की रोकथाम के लिए मैलाथियोन 50 ई.सी. 1 लीटर या डायमियोएक 30 ई.सी. या मोनोक्रोटोफाॅस 30 डब्ल्यू एस.सी.ए. की आधा लीटर या क्यूनालफाॅस 25 ई.सी. एक लीटर या मैलाथियोन 5 प्रतिशत पाउडर 25 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए। 

कटाई, गहाई व भण्डारण -

जब फलियाँ पक जाएँ और उनका रंग भूरा पड जाए तब कटाई करना चाहिए। कटाई के उपरान्त फसल को ढेर लगाकर 3-5 दिन के लिये धूप में सुखाते है। इसके बाद गहाई की जाती है। गहाई के बाद दाने को धूप में लगभग 8-10% नमी होने तक सुखाते हैं। इसके बाद दाने का भण्डारण किया जाता है।

उपज

उन्नत विधि से खेती करने पर दाने के लिए बोई गई फसल से 6-8 क्विंटल दाना प्रति हे. प्राप्त होता है तथा हरे चारे के लिए बोई गई फसल से 12-25 क्विंटल प्रति हे. हरा चारा प्राप्त होता है।

मोठ के अधिक उत्पादन लेने हेतु आवश्यक बिंदु -

  • ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई तीन वर्ष में एक बार अवश्य करें।
  • बुवाई पूर्व बीजोपचार अवश्य करें।
  • पोषक तत्वों की मात्रा मृदा परीक्षण के आधार पर ही दें।
  • पौध संरक्षण के लिये एकीकृत पौध संरक्षण के उपायों को अपनाना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण अवश्य करें। 

कहाँ संपर्क करें-

तकनीकी जानकारी हेतु अपने जिले / नजदीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से संपर्क करें।
भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा फसल उत्पादन (जुताई, खाद, बीज, सूक्ष्म पोषक तत्व, कीटनाशी, सिंचाई के साधनों), कृषि यन्त्रों, भण्डारण इत्यादि हेतु दी जाने वाली सुविधाओं/अनुदान सहायता/ लाभ की जानकारी हेतु संबंधित राज्य /जिला/ विकासखण्ड स्थित कृषि विभाग से संपर्क करें।

अधिक जानकारी हेतु देखें-

एम-किसान पोर्टल- http://mkisan.gov.in/
फार्मर पोर्टल- http://farmer.gov.in/
किसान काॅल सेन्टर- टोल-फ्री नं - 1800-180-1551

0 टिप्पणियाँ:

Post a Comment

Your comments are precious. Please give your suggestion for betterment of this blog. Thank you so much for visiting here and express feelings
आपकी टिप्पणियाँ बहुमूल्य हैं, कृपया अपने सुझाव अवश्य दें.. यहां पधारने तथा भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार

स्वागतं आपका.... Welcome here.

राजस्थान के प्रामाणिक ज्ञान की एकमात्र वेब पत्रिका पर आपका स्वागत है।
"राजस्थान की कला, संस्कृति, इतिहास, भूगोल और समसामयिक दृश्यों के विविध रंगों से युक्त प्रामाणिक एवं मूलभूत जानकारियों की एकमात्र वेब पत्रिका"

"विद्यार्थियों के उपयोग हेतु राजस्थान से संबंधित प्रामाणिक तथ्यों को हिंदी माध्यम से देने के लिए किया गया यह प्रथम विनम्र प्रयास है।"

राजस्थान सम्बन्धी प्रामाणिक ज्ञान को साझा करने के इस प्रयास को आप सब पाठकों का पूरा समर्थन प्राप्त हो रहा है। कृपया आगे भी सहयोग देते रहे। आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत है। कृपया प्रतिक्रिया अवश्य दें। धन्यवाद।

विषय सूची

Rajasthan GK (432) राजस्थान सामान्य ज्ञान (373) Current Affairs (254) GK (240) सामान्य ज्ञान (157) राजस्थान समसामयिक घटनाचक्र (129) Quiz (126) राजस्थान की योजनाएँ (106) समसामयिक घटनाचक्र (103) Rajasthan History (90) योजनाएँ (85) राजस्थान का इतिहास (52) समसामयिकी (52) General Knowledge (45) विज्ञान क्विज (40) सामान्य विज्ञान (34) Geography of Rajasthan (32) राजस्थान का भूगोल (30) Agriculture in Rajasthan (25) राजस्थान में कृषि (25) राजस्थान के मेले (24) राजस्थान की कला (22) राजस्थान के अनुसन्धान केंद्र (21) Art and Culture (20) योजना (20) राजस्थान के मंदिर (20) Daily Quiz (19) राजस्थान के संस्थान (19) राजस्थान के किले (18) Forts of Rajasthan (17) राजस्थान के तीर्थ स्थल (17) राजस्थान के प्राचीन मंदिर (17) राजस्थान के दर्शनीय स्थल (16) राजस्थानी साहित्य (16) अनुसंधान केन्द्र (15) राजस्थान के लोक नाट्य (15) राजस्थानी भाषा (13) Minerals of Rajasthan (12) राजस्थान के हस्तशिल्प (12) राजस्थान के प्रमुख पर्व एवं उत्सव (10) राजस्थान की जनजातियां (9) राजस्थान के लोक वाद्य (9) राजस्थान में कृषि योजनाएँ (9) राजस्थान में पशुधन (9) राजस्थान की चित्रकला (8) राजस्थान के कलाकार (8) राजस्थान के खिलाड़ी (8) राजस्थान के लोक नृत्य (8) forest of Rajasthan (7) राजस्थान के उद्योग (7) राजस्थान सरकार मंत्रिमंडल (7) वन एवं पर्यावरण (7) शिक्षा जगत (7) राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार (6) राजस्थान की झीलें (5) राजस्थान की नदियाँ (5) राजस्थान की स्थापत्य कला (5) राजस्थान के ऐतिहासिक स्थल (5) Livestock in Rajasthan (4) इतिहास जानने के स्रोत (4) राजस्थान की जनसंख्या (4) राजस्थान की जल धरोहरों की झलक (4) राजस्थान के संग्रहालय (4) राजस्थान में जनपद (4) राजस्थान में प्रजामण्डल आन्दोलन (4) राजस्थान रत्न पुरस्कार (4) राजस्थान सरकार के उपक्रम (4) राजस्थान साहित्य अकादमी (4) राजस्थानी साहित्य की प्रमुख रचनाएं (4) विश्व धरोहर स्थल (4) DAMS AND TANKS OF RAJASTHAN (3) Handicrafts of Rajasthan (3) राजस्थान की वन सम्पदा (3) राजस्थान की वेशभूषा (3) राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएँ (3) राजस्थान के आभूषण (3) राजस्थान के जिले (3) राजस्थान के महोत्सव (3) राजस्थान के राज्यपाल (3) राजस्थान के रीति-रिवाज (3) राजस्थान के लोक संत (3) राजस्थान के लोक सभा सदस्य (3) राजस्थान में परम्परागत जल प्रबन्धन (3) Jewelry of Rajasthan (2) पुरस्कार (2) राजस्थान का एकीकरण (2) राजस्थान की उपयोगी घासें (2) राजस्थान की मीनाकारी (2) राजस्थान के अधात्विक खनिज (2) राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्र (2) राजस्थान के जैन तीर्थ (2) राजस्थान के प्रमुख शिलालेख (2) राजस्थान के महल (2) राजस्थान के लोकगीत (2) राजस्थान बजट 2011-12 (2) राजस्थान मदरसा बोर्ड (2) राजस्थान में गौ-वंश (2) राजस्थान में पंचायतीराज (2) राजस्थान में प्राचीन सभ्यताएँ (2) राजस्थान में मत्स्य पालन (2) राजस्‍व मण्‍डल राजस्‍थान (2) राजस्थान का खजुराहो जगत का अंबिका मंदिर (1) राजस्थान का मीणा जनजाति आन्दोलन (1) राजस्थान की स्थिति एवं विस्तार (1) राजस्थान के कला एवं संगीत संस्थान (1) राजस्थान के चित्र संग्रहालय (1) राजस्थान के तारागढ़ किले (1) राजस्थान के धरातलीय प्रदेश (1) राजस्थान के धात्विक खनिज (1) राजस्थान के विधानसभाध्यक्ष (1) राजस्थान के संभाग (1) राजस्थान के सूर्य मंदिर (1) राजस्थान दिव्यांगजन नियम 2011 (1) राजस्थान निवेश संवर्धन ब्यूरो (1) राजस्थान बार काउंसिल (1) राजस्थान में चीनी उद्योग (1) राजस्थान में प्रथम (1) राजस्थान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक (1) राजस्थान में यौधेय गण (1) राजस्थान में वर्षा (1) राजस्थान में सडक (1) राजस्थान राज्य गैस लिमिटेड (1) राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (1) राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (1) राजस्थान सुनवाई का अधिकार (1) राजस्थानी की प्रमुख बोलियां (1) राजस्थानी भाषा का वार्ता साहित्य (1) राजस्थानी साहित्य का काल विभाजन- (1) राजस्‍थान राज्‍य मानव अधिकार आयोग (1) राज्य महिला आयोग (1) राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र बीकानेर (1) सिन्धु घाटी की सभ्यता (1)
All rights reserve to Shriji Info Service.. Powered by Blogger.

Disclaimer:

This Blog is purely informatory in nature and does not take responsibility for errors or content posted in this blog. If you found anything inappropriate or illegal, Please tell administrator. That Post would be deleted.