12/28/2013 04:05:00 pm
4

राजसमन्द का राजप्रशस्ति शिलालेख-

राजप्रशस्ति महाकाव्य की रचना श्री रणछोड़ भट्ट नामक संस्कृत कवि द्वारा मेवाड़ के महाराणा राजसिंह की आज्ञा से 1676 ई. में की थी इस ग्रन्थ के लिखे जाने के छ: वर्ष पश्चात महाराणा जयसिंह की आज्ञा से इसे शिलाओं पर उत्कीर्ण किया गया छठी शिला में इसका संवत 1744 दिया हुआ है इसे 25 बड़ी शिलाओं में उत्कीर्ण करवा कर राजसमन्द झील की नौ चौकी पाल (बांध) पर विभिन्न ताकों में स्थापित किया गया यह भारत का सबसे बड़ा शिलालेख है इसका प्रत्येक शिलाखंड काले पत्थर से निर्मित है जिनका आकार तीन फुट लम्बा तथा ढाई फुट चौड़ा है प्रथम शिलालेख में माँ दुर्गा, गणपति गणेश, सूर्य आदि देवी-देवताओं की स्तुति है संस्कृत भाषा में प्रणीत इस महाकाव्य के शेष 24 शिलालेखों में प्रत्येक में एक-एक सर्ग है तथा इस प्रकार कुल 24 सर्ग है इसमें कुल 1106 श्लोक है। संस्कृत भाषा में होने के बावजूद इसमें अरबी, फ़ारसी तथा लोकभाषा का भी प्रभाव है। इसमें मुख्यतः महाराणा राजसिंह के जीवन-चरित्र एवं उनकी उपलब्धियों का वर्णन किया गया है किन्तु इसके प्रथम 5 सर्गों में मेवाड़ का प्रारंभिक इतिहास दिया गया है। इसके अलावा इसमें 17 शताब्दी में मेवाड़ की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक तथा राजनैतिक दशा का भी वर्णन मिलता है। यह एक ऐसा काव्य है जिसमें कविता कम और इतिहास प्रधान है। कवि ने महाराणा राजसिंह से संबंधित जिन घटनाओं का वर्णन इसमें किया है वो उसकी स्वयं की आँखों देखी है। इसमें राजसमन्द झील के निर्माण के दुष्कर कार्य, इस पर हुए खर्च तथा इसकी प्रतिष्ठा का वर्णन किया गया है। इसके अतिरिक्त इसमें तत्कालीन मेवाड़ की संस्कृति, वेशभूषा, शिल्पकला, दान-प्रणाली, मुद्रा, युद्ध-नीति, धर्म-कर्म आदि का भी अच्छा उल्लेख है। इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू के अनुसार राजप्रशस्ति पहला अभिलेख है, जिसमें पृथ्‍वीराज रासो का प्रसंग संस्‍कृत में उद़धृत किया गया है इसमें बप्‍पा रावल की कथा को एकलिंगपुराण से उठाया गया है इसमें सूर्यवंश की वंशावली के साथ गुहिल वंश का संबंध स्‍थापित किया गया है और इस वंश को विप्र के बजाय सूर्यवंश बताने का प्रयास किया गया है। रणछोड भट्ट की एक अन्‍य कृति है जयसमंद प्रशस्ति, जो अप्रकाशित है। 


  राजसमन्द के शिक्षाविद डॉ. राकेश तैलंग के अनुसार राज-प्रशस्ति चंदवरदाई के काल को एक नई सोच के साथ निर्धारण करने की संभावना को प्रस्तुत करता है। राज-प्रशस्ति के मुताबिक चंदवरदाई कि स्थिति 16 वीं शताब्दी है, जबकि दूसरी ओर प्रायः चंदवरदाई का काल 11वीं शताब्दी में पृथ्वीराज राठौड़ के साथ जोड़ कर देखा जाता है। उनके अनुसार पंडित रणछोड़ भट्ट पद्माकर और लाल कवि की पूर्वज परंपरा के तैलंग ब्राह्मण थे जिन्हें इस काव्य के लेखन के लिए सागर (म.प्र.) से बुलाया गया था।

 

राजप्रशस्ति की शिलाओं की विषय वस्तु -

 

प्रथम शिला-

भगवान राम शिव भवानी गणेश व सूर्य स्तुति सहित पंडित रणछोड़ भट्ट द्वारा ग्रंथ की कुशल पूर्णता की कामना।



द्वितीय शिला- 


कवि द्वारा कवि द्वारा स्वयं के परिवार के परिचय के साथ राजसमंद निर्माण और राज प्रशस्ति के लेखन काल का उल्लेख है। यही कवि ने अपने आश्रयदाता महाराणा श्री राज सिंह जी का यशोगान भी किया है।

तृतीय शिला-  


यहां उदयपुर के विवस्वान वंशी अर्थात सूर्यवंशी महाराणा का वर्णन किया गया है।  

चतुर्थ शिला-


इस शिला में सूर्यवंशी 4 आदित्य राजा सहित गुहिल वंश का वर्णन है तथा सिसोदिया वंश के विस्तार का उल्लेख है।

पंचम शिला-

महाराणा उदय सिंह से लेकर राणा प्रताप के वंश का यहां वर्णन है। राणा रतन सिंह और अलाउद्दीन खिलजी के युद्ध सहित मोकल और महाराणा कुंभा की परंपरा का उल्लेख किया गया है तथा साथ ही हल्दीघाटी के युद्ध का भी वर्णन इसमें है।


षट शिला- 


इसमें मुख्यतः महाराणा राज सिंह के जन्म का उल्लेख है तथा उनके पिता महाराणा जगतसिंह के यश की गाथा है इसके साथ ही उनके द्वारा किए गए कल्पवृक्ष, स्वर्ण पृथ्वी, महासमर और विश्व चक्र का उल्लेख है।

सप्तम शिला-


इस शिला में महाराणा राज सिंह के राज्य सिंहासन पर आसीन होने तथा उनके पुत्र जय सिंह और अन्य चार पुत्रों के जन्म का उल्लेख है। पंडित मधुसुदन भट्ट को श्वेत अश्व देने का वर्णन भी इसमें है।

अष्टम शिला-


इसमें महाराणा राज सिंह अंग, बंग, कलिंग, उत्कल, सौराष्ट्र, केकड़ी, दरीबा, मांडल, बनेडा, शाहपुरा की विजय का वर्णन किया गया है।

नवम शिला -


इसमें औरंगजेब के साथ मेवाड़ के सम्बन्ध सुधार के लिए राणा राजसिंह के प्रयासों का वर्णन है।

दशम शिला -


इसमें वि.सं. 1698 में युवराज के रूप में राणा राजसिंह जी के विवाह हेतु जैसलमेर यात्रा का उल्लेख है। इसी में राजपुरोहित गरीबदास के सुझाव पर गोमती नदी को बाँध कर राजसमन्द झील के निर्माण कार्य को आरम्भ कराने का वर्णन है।


एकादश शिला -


इसमें राजसमन्द की पाल पर श्री द्वारकाधीश के विराजमान होने का वर्णन है। वि. सं. 1726 वैशाख 13  को कांकरोली पाल के निर्माण सहित वरुण सूक्त जप द्वारा राजसमन्द को जलपूरित किए जाने का वर्णन है ।

द्वादश शिला -


इसमें शिल्पशास्त्र के अनुसार राजसमन्द को निर्मित किए जाने का वर्णन है ।


त्रयोदश शिला-


इसमें उन गाँवों का वर्णन है जिनके जलमग्न होने या डूब जाने के कारण राजसमन्द झील का  निर्माण हुआ। सुवर्ण पृथ्वी व विश्व चक्र दान के साथ झील में नौकायन का वर्णन इस शिला में किया गया है।

चतुर्दश शिला-


इसमें निर्माण कार्य की पूर्णता पर प्रतिष्ठा और वापी महोत्सव का विस्तार से वर्णन है।

पंचदश शिला -

 

प्रधान राणी सदा कुँवरी के साथ राणा राजसिंह के तुलादान का वर्णन इस शिला में हैं।

षोडश शिला -


इस शिला में गौ बछड़े के पूजन के साथ महाराणा राजसिंह की प्रजा सहित जलयात्रा, दीपदान तथा रत्न छोड़े जाने का उल्लेख किया गया है।

सप्तदश शिला-


इसमें राणा राजसिंह द्वारा राजसमुद्र की छः दिवसीय 14 कोस की परिक्रमा व सत्र बंधन का सविस्तार वर्णन है।

अष्टादश शिला -


इसमें प्रतिष्ठा महोत्सव को सकुटुम्ब संपन्न करने और स्वर्ण तुला दान का वर्णन किया गया है।

एकोनविंशति शिला -

विभिन्न दानों के साथ संलग्न गाँव का नामकरण राजनगर किए जाने वर्णन है तथा इसके किनारे स्थित प्रभु द्वारिकाधीश की अभ्यर्थना इसमें की गई है।

विंशति शिला-


इस शिला में राजसमन्द के निर्माण में जलमग्न हुए गाँवों की वंदना की गई है तथा समीप स्थित ग्रामों को तीर्थ रूप में बताया गया है।


एकविंशति शिला-

इस शिला में राणा राजसिंह द्वारा निर्माण में सहयोगी रहे राजाओं, सम्बंधियों और आश्रितों को उपहार दिए जाने का उल्लेख है।

द्वि-विंशति शिला-


इस शिला में शेषनाग और सरस्वती से वर्णनातीत निर्माण कार्य में हुए व्यय का वर्णन है।

त्रयोविंशति शिला-


इसमें औरंगजेब से अच्छे संबंध के प्रयास के बावजूद मांडल से उदयसागर जाने के मार्ग में बीच में ही राजसमुद्र के पास उसके भीषण प्रतिकार का वर्णन किया गया है।

चतुर्विंशति शिला-


इस शिलालेख में कार्तिक शुक्ल 10 वि.सं. 1636 में ओड़ा गाँव में राणा राजसिंह के देहांत का वर्णन है। विकट सामरिक परिस्थितियों में राणा राजसिंह के पुत्र जय सिंह और अनुजों का साहस अतुलनीय था।

पंचविंशति शिला-


इस शिला में महाकाव्य के नियमों की अनुपालना में विगत सत्रों की घटनाओं का सार संक्षेप में वर्णन प्रस्तुत किया गया है।

 

4 टिप्पणियाँ:

  1. Sir is rajprashasti kis se prerit hokar likhi gyi haj

    ReplyDelete
  2. इसका लेखन महाराणा राजसिंह की आज्ञा से किया गया था ..

    ReplyDelete
  3. यहाँ पर अमरसिंह ने अपना अंतिम समय बिताया था इसी कारण

    ReplyDelete

Your comments are precious. Please give your suggestion for betterment of this blog. Thank you so much for visiting here and express feelings
आपकी टिप्पणियाँ बहुमूल्य हैं, कृपया अपने सुझाव अवश्य दें.. यहां पधारने तथा भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार

स्वागतं आपका.... Welcome here.

राजस्थान के प्रामाणिक ज्ञान की एकमात्र वेब पत्रिका पर आपका स्वागत है।
"राजस्थान की कला, संस्कृति, इतिहास, भूगोल और समसामयिक दृश्यों के विविध रंगों से युक्त प्रामाणिक एवं मूलभूत जानकारियों की एकमात्र वेब पत्रिका"

"विद्यार्थियों के उपयोग हेतु राजस्थान से संबंधित प्रामाणिक तथ्यों को हिंदी माध्यम से देने के लिए किया गया यह प्रथम विनम्र प्रयास है।"

राजस्थान सम्बन्धी प्रामाणिक ज्ञान को साझा करने के इस प्रयास को आप सब पाठकों का पूरा समर्थन प्राप्त हो रहा है। कृपया आगे भी सहयोग देते रहे। आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत है। कृपया प्रतिक्रिया अवश्य दें। धन्यवाद।

विषय सूची

Rajasthan GK (432) राजस्थान सामान्य ज्ञान (373) Current Affairs (254) GK (240) सामान्य ज्ञान (157) राजस्थान समसामयिक घटनाचक्र (129) Quiz (126) राजस्थान की योजनाएँ (106) समसामयिक घटनाचक्र (103) Rajasthan History (90) योजनाएँ (85) राजस्थान का इतिहास (52) समसामयिकी (52) General Knowledge (45) विज्ञान क्विज (40) सामान्य विज्ञान (34) Geography of Rajasthan (32) राजस्थान का भूगोल (30) Agriculture in Rajasthan (25) राजस्थान में कृषि (25) राजस्थान के मेले (24) राजस्थान की कला (22) राजस्थान के अनुसन्धान केंद्र (21) Art and Culture (20) योजना (20) राजस्थान के मंदिर (20) Daily Quiz (19) राजस्थान के संस्थान (19) राजस्थान के किले (18) Forts of Rajasthan (17) राजस्थान के तीर्थ स्थल (17) राजस्थान के प्राचीन मंदिर (17) राजस्थान के दर्शनीय स्थल (16) राजस्थानी साहित्य (16) अनुसंधान केन्द्र (15) राजस्थान के लोक नाट्य (15) राजस्थानी भाषा (13) Minerals of Rajasthan (12) राजस्थान के हस्तशिल्प (12) राजस्थान के प्रमुख पर्व एवं उत्सव (10) राजस्थान की जनजातियां (9) राजस्थान के लोक वाद्य (9) राजस्थान में कृषि योजनाएँ (9) राजस्थान में पशुधन (9) राजस्थान की चित्रकला (8) राजस्थान के कलाकार (8) राजस्थान के खिलाड़ी (8) राजस्थान के लोक नृत्य (8) forest of Rajasthan (7) राजस्थान के उद्योग (7) राजस्थान सरकार मंत्रिमंडल (7) वन एवं पर्यावरण (7) शिक्षा जगत (7) राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार (6) राजस्थान की झीलें (5) राजस्थान की नदियाँ (5) राजस्थान की स्थापत्य कला (5) राजस्थान के ऐतिहासिक स्थल (5) Livestock in Rajasthan (4) इतिहास जानने के स्रोत (4) राजस्थान की जनसंख्या (4) राजस्थान की जल धरोहरों की झलक (4) राजस्थान के संग्रहालय (4) राजस्थान में जनपद (4) राजस्थान में प्रजामण्डल आन्दोलन (4) राजस्थान रत्न पुरस्कार (4) राजस्थान सरकार के उपक्रम (4) राजस्थान साहित्य अकादमी (4) राजस्थानी साहित्य की प्रमुख रचनाएं (4) विश्व धरोहर स्थल (4) DAMS AND TANKS OF RAJASTHAN (3) Handicrafts of Rajasthan (3) राजस्थान की वन सम्पदा (3) राजस्थान की वेशभूषा (3) राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएँ (3) राजस्थान के आभूषण (3) राजस्थान के जिले (3) राजस्थान के महोत्सव (3) राजस्थान के राज्यपाल (3) राजस्थान के रीति-रिवाज (3) राजस्थान के लोक संत (3) राजस्थान के लोक सभा सदस्य (3) राजस्थान में परम्परागत जल प्रबन्धन (3) Jewelry of Rajasthan (2) पुरस्कार (2) राजस्थान का एकीकरण (2) राजस्थान की उपयोगी घासें (2) राजस्थान की मीनाकारी (2) राजस्थान के अधात्विक खनिज (2) राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्र (2) राजस्थान के जैन तीर्थ (2) राजस्थान के प्रमुख शिलालेख (2) राजस्थान के महल (2) राजस्थान के लोकगीत (2) राजस्थान बजट 2011-12 (2) राजस्थान मदरसा बोर्ड (2) राजस्थान में गौ-वंश (2) राजस्थान में पंचायतीराज (2) राजस्थान में प्राचीन सभ्यताएँ (2) राजस्थान में मत्स्य पालन (2) राजस्‍व मण्‍डल राजस्‍थान (2) राजस्थान का खजुराहो जगत का अंबिका मंदिर (1) राजस्थान का मीणा जनजाति आन्दोलन (1) राजस्थान की स्थिति एवं विस्तार (1) राजस्थान के कला एवं संगीत संस्थान (1) राजस्थान के चित्र संग्रहालय (1) राजस्थान के तारागढ़ किले (1) राजस्थान के धरातलीय प्रदेश (1) राजस्थान के धात्विक खनिज (1) राजस्थान के विधानसभाध्यक्ष (1) राजस्थान के संभाग (1) राजस्थान के सूर्य मंदिर (1) राजस्थान दिव्यांगजन नियम 2011 (1) राजस्थान निवेश संवर्धन ब्यूरो (1) राजस्थान बार काउंसिल (1) राजस्थान में चीनी उद्योग (1) राजस्थान में प्रथम (1) राजस्थान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक (1) राजस्थान में यौधेय गण (1) राजस्थान में वर्षा (1) राजस्थान में सडक (1) राजस्थान राज्य गैस लिमिटेड (1) राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (1) राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (1) राजस्थान सुनवाई का अधिकार (1) राजस्थानी की प्रमुख बोलियां (1) राजस्थानी भाषा का वार्ता साहित्य (1) राजस्थानी साहित्य का काल विभाजन- (1) राजस्‍थान राज्‍य मानव अधिकार आयोग (1) राज्य महिला आयोग (1) राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र बीकानेर (1) सिन्धु घाटी की सभ्यता (1)
All rights reserve to Shriji Info Service.. Powered by Blogger.

Disclaimer:

This Blog is purely informatory in nature and does not take responsibility for errors or content posted in this blog. If you found anything inappropriate or illegal, Please tell administrator. That Post would be deleted.